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डोडिया राजपूत

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डोडिया वंश की उत्पत्ति कदलीवृक्ष के डोडे (पुष्प)से एक साहसी वीर क्षत्रिय पुरूष दीपंग का जन्म हुआ । केले के डोडे पुष्पकली से उत्पन्न होने के कारण दीपंग का वंश डोडिया कहलाया । दीपंग का साम्राज्य विस्तार सौराष्ट्र हिंगलाज काठियिवाड एवं समुद्र तक था ।दीपंग की राजधानी मुल्तान थी । मेवाड़ के इतिहास में सरदारगढ़ ठिकाने के सामन्तो की प्रमुख भूमिका रही है। सरदारगढ़ के स्वामी काठियावाड़ स्थित शार्दुलगढ के सिंह  डोडिया के वंशज एवं ठाकुर इनकी पदवी थी मेवाड़ के वैदेशिक सरदार जो  अन्य प्रदेशों से महाराणा की सेवा  मे आये थे, उनमें डोडिया वंश सबसे प्राचीन राजवंश था । 🌱डोडिया वंश की उत्पत्ति🌱 एक प्राचीन मान्यतानुसार परशुराम द्वारा क्षत्रिय जाति का समूल नाश किये जाने के पश्चात पृथ्वी पर कोई वीर जाति शेष नहीं रही, जो वैदिक धर्म की रक्षा कर सके । चिन्तित ऋषि मुनियों ने क्षत्रिय वर्ण की पुर्नस्थापना के लिये एकत्रित होकर यज्ञ का आयोजन किया । तदनुसार शांडिल्य ऋषि ने यज्ञवेदी के चारो ओर कदली-स्तम्भ रोपकर यज्ञ सम्पूर्ण किया । इस प्रकार रोपे गये कदलीवृक्ष के डोडे (पुष्प)से एक साहसी वीर क्षत्रिय ...